टीवी मैकेनिक की बेटी सानिया बनीं देश की पहली मुस्लिम महिला फाइटर पायलट

नई दिल्ली। अगर कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो फिर इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। खास तौर पर तब जब ये लक्ष्य आपके साथ-साथ आपके माता-पिता की भी चाहत हो तो हौसले और भी बुलंद हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही कमाल किया है, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के छोटे से गांव की रहने वाली सानिया मिर्जा ने। सानिया ने एनडीए की परीक्षा में 149वीं रैंक के साथ फ्लाइंग विंग में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। फ्लाइंग में दो ही सीट है। एनडीए में मात्र 19 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। सब कुछ ठीक रहा तोएनडीए से पास आउट होकर सानिया देश की पहली मुस्लिम महिला फाइटर पायलट बन सकतीं हैं। सानिया के पिता शाहिद अली मिर्जापुर में टीवी मैकेनिक हैं। सानिया बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहती थी। 11वीं में पढ़ाई के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि सानिया मिर्जा ने एनडीए में जाने की ठान ली।

मिर्जापुर के छोटे से गांव जसोवर की रहने वाली हैं। प्राइमरी से लेकर 10वीं तक की शिक्षा गांव के ही पंडित चिंतामणि दुबे इंटर कॉलेज से पूरी की। यूपी बोर्ड की परीक्षा में जिला टॉपर भी रही हैं। इसके बाद सानिया ने शहर के गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की।
सानिया ने बीते 10 अप्रैल उन्होंने एनडीए की परीक्षा दी। नवंबर में जारी लिस्ट में उनका चयन हुआ है। वे फ्लाइंग में चुनी जाने वाली दो महिलाओं में से एक हैं। सानिया एनडीए ट्रेनिंग के लिए 27 दिसंबर को पुणे में ज्वाइन करेंगी। सानिया ने बताया कि सीबीएसई, आईसीएसई ही नहीं, यूपी बोर्ड के विद्यार्थी भी एनडीए में जा सकते हैं।
सानिया मिर्जा ने कहा कि मैं इंजीनियर बनना चाहती थी। 11वीं में देश की प्रथम महिला फाइटर पायलट अवनी चतुर्वेदी के बारे में जाना। वह मेरी प्रेरणा स्रोत बन गईं और मैंने एनडीए में जाने की ठान ली। मैंने सोचा कि मुझे भी ऐसा ही कुछ करना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों, खासकर लड़कियों के लिए मैं प्रेरणा बन सकूं। हमारे समाज में पढ़ाने से ज्यादा शादी के दहेज के लिए परिजन मेहनत करते हैं। देश सेवा सिर्फ जज्बा नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।
सानिया के पिता शाहिद अली ने कहा कि एक टीवी मैकेनिक सामान्य जीवन जीता है। बेटी के अंदर प्रतिस्पर्धा और लगन को देखा तो लक्ष्य हासिल करने में उसकी मदद करने लगा। हाईस्कूल में टॉप किया तो लगा कि बिटिया कुछ करना चाहती है। जिला टॉप करने के बाद एनडीए में जाने की इच्छा जताई। बिटिया ने मुझसे कहा कि वह एनडीए के रास्ते देश सेवा के लिए जाना चाहती है तो हमने भी उसका पूरा साथ दिया। सानिया की मां तबस्सुम ने कहा कि हमारी बच्ची ने मां के साथ ही गांव का सम्मान रखा। मान सम्मान सपना सब कुछ पूरा कर दिया। उसने यह सिद्ध किया कि गांव की बच्ची कुछ भी कर सकती है। समस्याएं आती हैं लेकिन सफलता मिलने के बाद सब कुछ उसके सामने छोटा हो जाता है। लोग आपकी कामयाबी को याद रखते हैं।

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