विज्ञापन के लिए संपर्क करें :- +918630520090

Search
Close this search box.
Search
Close this search box.

दिल्ली में होगा किसका राज, किसका पलड़ा किस पर भारी

नई दिल्ली / सरिता सिंह। दिल्ली में नगर निगम चुनाव के लिए रविवार को शाम साढ़े पांच बजे तक लगभग 50.47 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। चुनाव के लिए चुनाव आयोग के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी तमाम प्रयास किए। इसके बावजूद कोई लहर नहीं दिखी। नजीता यह रहा कि 50.47 प्रतिशत ही मतदान हो सका, जो वर्ष 2012 और 2017 से भी कम है।

कम मतदान होने के मायने क्या इस पर अब भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कई ऐसे उदाहरण है कि मतदान का प्रतिशत कम होने के बाद भी सत्तारुढ़ दल ने वापसी की है जबकि कुछ मामलों में सत्ता परिवर्तन हो गया है।

 

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में सभी वार्ड में शाम साढ़े पांच बजे तक 50.47% मतदान दर्ज किया गया। मतदान शाम 5.30 बजे समाप्त हुआ। हालांकि दोपहर 12.30 बजे तक 18 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि 2.30 बजे तक 30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। अधिकारियों से मिली जानकरी के मुताबिक शाम चार बजे तक 45 परसेंट से ज्याद मतदान हुआ था।

तो ऐसे में ऐसे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना गलत होगा। हालांकि यह जरुर कहा जा सकता है कि मतदान का प्रतिशत कम होने के पीछे भी वह मतदाता भी आगे नहीं आए जो कि प्रत्याशियों की जीत हार को तय करते हैं। ऐसे में प्रत्याशियों में जीत और हार का आंकड़ा बहुत नजदीक का हो सकता है।

‘मतदान के प्रतिशत से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं’

मतदान प्रतिशत कम रहने के मायने का विश्वलेषण करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर संगीत रागी कहते हैं कि मतदान के प्रतिशत से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है, क्योंकि कई बार कम मतदान सत्तारुढ़ दल की वापसी कराता है तो कई मामलों में यह परिवर्तन भी करा देता है।

ऐसे में यह कहना कि इससे भाजपा या आम आदमी पार्टी (आप) को लाभ होगा यह सही नहीं होगा। हां कम मतदान का मतलब यह है कि दिल्ली नगर निगम के चुनाव में दिल्ली के मतदाता रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि जमीनी मुद्दों के लिए तो यही चुनाव काम करता है। हालांकि बीते चुनावों में यह देखा गया है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में यही दिल्ली के मतदाता बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं वहीं, मतदाता दिल्ली नगर निगम के चुनाव में इतनी रुचि नहीं लेते हैं।

संभव है कि 100 या दौ सौ या फिर 1000 मतों के अंतर से जीत हार तय हो। चूंकि प्रत्याशियों की भी संख्या ज्यादा नहीं थी ऐसे में कई सीटों पर भाजपा और आप का कड़ा मुकबला देखा गया है। यह परिणाम में कितना परिवर्तित होता है सात दिसंबर को मतगणना से पता चल जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें